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क्या है

ब्रह्मांड क्या है?(22)

ब्रह्मांड का अर्थब्रह्मांड क्या है?ब्रह्मांड का महत्व
सरल उत्तर

शून्य, कारण जल, स्पंदन, आदिनाद, प्रथम श्वास, पंचभूत और ब्रह्मा से सृष्टि क्रम बढ़ता है।

स्रोत प्रश्न: हिंदू धर्म में ब्रह्मांड बनने का क्रम क्या है? →
लोक

एकार्णव क्या है?

एकार्णव नैमित्तिक प्रलय में त्रैलोक्य के भस्म होने के बाद होने वाली विनाशकारी वर्षा से बना वह विशाल महासागर है जो समस्त त्रैलोक्य को डुबो देता है।

#एकार्णव#महाप्रलय#समुद्र
लोक

शिशुमार चक्र क्या है?

शिशुमार चक्र भगवान वासुदेव का विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप है जिसमें समस्त ग्रह, नक्षत्र और तारे विभिन्न अंगों में स्थित हैं। इसकी धुरी ध्रुवलोक है।

#शिशुमार चक्र#ध्रुवलोक#ग्रह नक्षत्र
लोक

पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत क्या है?

पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत कहता है — जो ब्रह्माण्ड में है वही मानव शरीर में भी है। देवता, लोक और नक्षत्र सभी शरीर के विभिन्न अंगों में सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं।

#पिण्ड-ब्रह्माण्ड#सिद्धांत#गरुड़ पुराण
लोक

महर्लोक क्या है?

महर्लोक 14 लोकों में चौथा ऊर्ध्व लोक है जो स्वर्लोक के ऊपर और जनलोक के नीचे है। यह विशुद्ध आध्यात्मिक और तपोमयी ऊर्जा का लोक है।

#महर्लोक#परिचय#वैदिक
लोक

भूलोक क्या है?

भूलोक परब्रह्म की योगमाया द्वारा रचित कर्म, भोग और मोक्ष का क्षेत्र है। जहाँ तक सूर्य-चन्द्र का प्रकाश पहुँचे और प्राणी विचरण करें वह सब भूलोक है।

#भूलोक#कर्मभूमि#वैदिक
लोक

हिंदू धर्म में ब्रह्मांड बनने का क्रम क्या है?

शून्य, कारण जल, स्पंदन, आदिनाद, प्रथम श्वास, पंचभूत और ब्रह्मा से सृष्टि क्रम बढ़ता है।

#ब्रह्मांड#सृष्टि क्रम#हिंदू धर्म
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प्राणायाम का ब्रह्मांडीय अर्थ क्या है?

प्राणायाम भीतर के प्राण और ऊर्जा को संतुलित करता है।

#प्राणायाम#कुम्भक#ब्रह्मांड
लोक

पिंड और ब्रह्मांड का संबंध क्या है?

मनुष्य की श्वास ब्रह्मांडीय श्वास का सूक्ष्म रूप है।

#पिंड#ब्रह्मांड#श्वास
लोक

ब्रह्मांडीय स्पंदन क्या है?

यह सृष्टि को चलाने वाली चेतना की सूक्ष्म धड़कन है।

#स्पंदन#ब्रह्मांड#महामाया
लोक

सूत्रात्मा क्या होता है?

सूत्रात्मा ब्रह्मांडों को पिरोने वाला सूक्ष्म प्राण-सूत्र है।

#सूत्रात्मा#प्राण#ब्रह्मांड
लोक

प्राण-सूत्र क्या है?

प्राण-सूत्र ब्रह्मांडों को श्वास से जोड़ने वाला अदृश्य धागा है।

#प्राण-सूत्र#ब्रह्मांड#महाविष्णु
लोक

गर्भोदकशायी विष्णु कौन हैं?

वे प्रत्येक ब्रह्मांड के भीतर स्थित विष्णु स्वरूप हैं।

#गर्भोदकशायी विष्णु#ब्रह्मांड#ब्रह्मा
लोक

महाविष्णु की श्वास से क्या होता है?

उनकी श्वास से ब्रह्मांड जन्मते और लय को प्राप्त होते हैं।

#महाविष्णु#श्वास#ब्रह्मांड
लोक

सृष्टि का ब्लूप्रिंट किसे कहते हैं?

यह भावी सृष्टि की सूक्ष्म योजना है।

#सृष्टि ब्लूप्रिंट#नाभि-कमल#ब्रह्मांड
लोक

प्रलय क्या है?

प्रलय सृष्टि के विलय को कहते हैं।

#प्रलय#विलय#ब्रह्मांड
श्राद्ध विधि

पंचबलि क्या है?

पंचबलि वह विधान है जिसमें श्राद्ध का अन्न पितरों तक पहुँचाने के लिए पाँच विशेष जीवों को भोजन अर्पित किया जाता है। ये पाँच हैं गौ बलि, काक बलि, श्वान बलि, पिपीलिका बलि, और देवादि बलि। ये ब्रह्मांड के विभिन्न तत्त्वों और योनियों के प्रतिनिधि हैं। इसके बाद ब्राह्मण भोजन कराया जाता है।

#पंचबलि#पाँच जीव#श्राद्ध बलि
लोक

त्रिविक्रम रूप क्या है?

त्रिविक्रम रूप भगवान वामन का विराट रूप है, जिसमें उन्होंने दो पगों में अधोलोकों, पृथ्वी और ऊर्ध्व लोकों को नाप लिया।

#त्रिविक्रम रूप#वामन अवतार#भगवान विष्णु
लोक

वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान में तपोलोक का स्थान क्या है?

वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान में तपोलोक सात ऊर्ध्व लोकों में नीचे से छठा और ऊपर से दूसरा लोक है।

#वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान#तपोलोक#ऊर्ध्व लोक
लोक

योजन क्या है?

योजन वैदिक दूरी की इकाई है, जिसे प्रायः चार कोस या लगभग 13-16 किलोमीटर माना गया है।

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108 का महत्व

मंत्र जप में 108 संख्या का महत्व क्या है?

108 का महत्व: सूर्य-पृथ्वी = सूर्य व्यास × 108 (खगोल)। 12 राशि × 9 ग्रह = 108 (ज्योतिष)। 108 उपनिषद, शक्तिपीठ (वेद)। 108 मर्म स्थान (आयुर्वेद)। 108 नाड़ी केंद्र (तंत्र)। 10,800 दैनिक श्वास ÷ 100 = 108 (योग)।

#108#महत्व#ब्रह्मांड
शिव विज्ञान

शिवलिंग का वैज्ञानिक महत्व क्या है?

शिवलिंग शिव के अनंत ज्योति-स्तंभ का प्रतीक है — न ब्रह्मा इसका शिखर, न विष्णु इसका तल खोज सके (शिव पुराण)। लिंग + पीठ = शिव + शक्ति = पुरुष + प्रकृति। नर्मदेश्वर शिवलिंग का crystalline structure ऊर्जा संग्रह में सहायक माना गया है।

#शिवलिंग विज्ञान#ऊर्जा#ज्योतिर्लिंग
विज्ञान और धर्म

शिवलिंग का वैज्ञानिक महत्व क्या है?

शिवलिंग ब्रह्मांड की उत्पत्ति और पंचतत्वों का प्रतीक है। ग्रेनाइट व क्रिस्टल के पीज़ोइलेक्ट्रिक गुण जलाभिषेक से ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। मंत्रोच्चार की ध्वनि तरंगें वातावरण शुद्ध करती हैं। शिव पुराण में शिव को अनंत ज्योति स्तंभ कहा गया है।

#शिवलिंग#वैज्ञानिक महत्व#ऊर्जा
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