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क्या है

श्राद्ध क्या है?(68)

श्राद्ध का अर्थश्राद्ध क्या है?श्राद्ध का महत्व
सरल उत्तर

कथा में कहा गया है कि श्राद्ध में इस पवित्र आख्यान का पाठ करने से पितरों को बड़ी तृप्ति होती है।

स्रोत प्रश्न: श्राद्ध में भागवत कथा पढ़ने का फल क्या है? →
लोक वर्णन

पितृ लोक क्या है और पितर वहाँ कैसे रहते हैं?

पितृलोक भुवर्लोक/चंद्रलोक में स्थित है (विष्णु पुराण)। गीता (9.25): पितृ-भक्त पितृलोक जाते हैं। गरुड़ पुराण अनुसार कर्मों के आधार पर प्राप्त होता है। श्राद्ध-तर्पण से पितरों को तृप्ति मिलती है। दक्षिण दिशा पितरों की।

#पितृ लोक#पितर#श्राद्ध
श्रीमद्भागवत

श्राद्ध में भागवत कथा पढ़ने का फल क्या है?

कथा में कहा गया है कि श्राद्ध में इस पवित्र आख्यान का पाठ करने से पितरों को बड़ी तृप्ति होती है।

#श्राद्ध#भागवत कथा#पितृ तृप्ति
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध क्या है?

त्रयोदशी तिथि का पितृ श्राद्ध।

#त्रयोदशी श्राद्ध#पितृ पक्ष#श्राद्ध
लोक

एकादशी श्राद्ध में रौहिण मुहूर्त क्या है?

कुतुप के बाद का शुभ श्राद्ध समय।

#रौहिण मुहूर्त#पिण्डदान#श्राद्ध
लोक

एकादशी श्राद्ध में भगवान विष्णु की भूमिका क्या है?

पितृ कर्म विष्णु आराधना का अंग है।

#भगवान विष्णु#श्राद्ध#पितृ मोक्ष
लोक

विष्णु पुराण में पितृ गाथा क्या है?

पितरों की श्राद्ध-आकांक्षा का वर्णन।

#विष्णु पुराण#पितृ गाथा#श्राद्ध
लोक

दशमी श्राद्ध क्या है?

दशमी तिथि पर किया जाने वाला पितृ श्राद्ध।

#दशमी श्राद्ध#पितृ पक्ष#श्राद्ध
लोक

नवमी श्राद्ध में मातृ वसु क्या है?

माता को वसु स्वरूप मानना।

#मातृ वसु#याज्ञवल्क्य स्मृति#श्राद्ध
लोक

मातृ ऋण क्या होता है?

माता और मातृ-पक्ष के प्रति कृतज्ञता का ऋण।

#मातृ ऋण#मातृ नवमी#श्राद्ध
लोक

नवमी श्राद्ध का शास्त्रीय महत्व क्या है?

यह मातृ-शक्ति और मातृ-ऋण का श्राद्ध है।

#नवमी महत्व#श्राद्ध#धर्मशास्त्र
लोक

अविधवा नवमी क्या है?

सुहागिन अवस्था में दिवंगत स्त्री का श्राद्ध।

#अविधवा नवमी#सुहागिन स्त्री#श्राद्ध
लोक

अष्टमी श्राद्ध में पशु पक्षियों का महत्व क्या है?

वे पंचबलि और पितृ संदेश के वाहक हैं।

#पशु पक्षी#पंचबलि#श्राद्ध
लोक

अन्वष्टका क्या है?

अष्टका के बाद की नवमी श्राद्ध तिथि।

#अन्वष्टका#मातृ नवमी#श्राद्ध
लोक

अष्टमी श्राद्ध में श्वान बलि क्या है?

कुत्ते के लिए निकाला गया अन्न भाग।

#श्वान बलि#पंचबलि#श्राद्ध
लोक

अष्टका श्राद्ध क्या है?

शीतकालीन मासों की कृष्ण अष्टमी का श्राद्ध।

#अष्टका#गृह्यसूत्र#श्राद्ध
लोक

अष्टमी श्राद्ध क्या है?

अष्टमी तिथि पर किया गया पितृ श्राद्ध।

#अष्टमी श्राद्ध#पितृ पक्ष#श्राद्ध
लोक

पंचबलि क्या है?

गाय, कुत्ते, कौवे, देवताओं और चींटियों के लिए पाँच ग्रास पंचबलि हैं।

#पंचबलि#श्राद्ध#काक बलि
लोक

अग्नौकरण क्या है?

घृत और अन्न की अग्नि में आहुति देना अग्नौकरण है।

#अग्नौकरण#श्राद्ध#आहुति
लोक

रौहिण मुहूर्त क्या है?

कुतुप के बाद का श्राद्धयोग्य समय रौहिण मुहूर्त है।

#रौहिण मुहूर्त#श्राद्ध#पार्वण
लोक

पितृलोक क्या है?

पितरों का पारलौकिक लोक पितृलोक है।

#पितृलोक#पितर#श्राद्ध
लोक

पितृ ऋण क्या होता है?

पूर्वजों के प्रति मनुष्य का ऋण पितृ ऋण है।

#पितृ ऋण#श्राद्ध#ऋण त्रय
लोक

पिण्डदान क्या है?

पितरों को पिण्ड अर्पित करना पिण्डदान है।

#पिण्डदान#पिण्ड#श्राद्ध
लोक

पितृ ऋण क्या होता है?

पूर्वजों के प्रति जन्मजात ऋण पितृ ऋण है।

#पितृ ऋण#श्राद्ध#तर्पण
लोक

श्राद्ध में विश्वेदेव कौन हैं?

श्राद्ध में पुरूरव और आर्द्रव विश्वेदेवों का आवाहन होता है।

#विश्वेदेव#श्राद्ध#पुरूरव आर्द्रव
लोक

पितृदोष क्या होता है?

श्राद्ध उपेक्षा से पितरों की अशांति को पितृदोष कहा जाता है।

#पितृदोष#पितृ शाप#श्राद्ध
लोक

घात चतुर्दशी क्या है?

अकाल मृत्यु वालों के श्राद्ध की चतुर्दशी घात चतुर्दशी है।

#घात चतुर्दशी#अकाल मृत्यु#श्राद्ध
लोक

पितृलोक क्या है?

पितरों का पारलौकिक लोक पितृलोक कहलाता है।

#पितृलोक#पितर#श्राद्ध
लोक

तर्पण क्या होता है?

जल और तिल से पितरों को तृप्त करना तर्पण है।

#तर्पण#पितृ जल#श्राद्ध
लोक

पितृ ऋण क्या होता है?

पूर्वजों के प्रति जन्मजात कर्तव्य को पितृ ऋण कहते हैं।

#पितृ ऋण#श्राद्ध#पितृ कर्तव्य
लोक

पितृ यज्ञ क्या है?

पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक अन्न और तर्पण अर्पित करना पितृ यज्ञ है।

#पितृ यज्ञ#श्राद्ध#पितृ तर्पण
लोक

पंचबलि क्या है?

पाँच जीव/शक्तियों के लिए अन्न अर्पण पंचबलि है।

#पंचबलि#श्राद्ध#पितृ कर्म
लोक

पिण्डदान क्या है?

पितरों को पिण्ड अर्पित करने की क्रिया पिण्डदान है।

#पिण्डदान#श्राद्ध#पितृ तृप्ति
लोक

विश्वेदेव कौन हैं?

विश्वेदेव श्राद्ध की रक्षा करने वाले देवता हैं।

#विश्वेदेव#श्राद्ध#रक्षक देवता
लोक

पितृ ऋण क्या है?

पूर्वजों के प्रति जन्मजात ऋण को पितृ ऋण कहा जाता है।

#पितृ ऋण#श्राद्ध#तर्पण
श्राद्ध विधि

श्वान बलि किसे कहते हैं?

श्वान बलि पंचबलि का तीसरा अंग है, जिसमें श्राद्ध के अन्न का अंश कुत्ते के लिए निकाला जाता है। श्वान का अर्थ कुत्ता और बलि का अर्थ अर्पण है। पंचबलि के माध्यम से श्राद्ध का अंश ब्रह्मांड के विभिन्न तत्त्वों तक पहुँचाया जाता है, और कुत्ता भी उन्हीं में से एक प्रतिनिधि है।

#श्वान बलि#कुत्ता अर्पण#पंचबलि
श्राद्ध विधि

पिण्डदान क्या है?

पिण्डदान श्राद्ध का हृदय है। पके हुए चावल, गाय का दूध, घी, शहद, जौ और काले तिल को मिलाकर गोलाकार तीन पिण्ड बनाए जाते हैं, जो पिता, पितामह और प्रपितामह तीन पीढ़ियों के प्रतीक होते हैं। इन्हें वेदी पर कुशा बिछाकर स्थापित किया जाता है। इसकी शुरुआत भगवान वराह ने की थी।

#पिण्डदान#श्राद्ध#तीन पीढ़ी
श्राद्ध विधि

तर्पण क्या होता है?

तर्पण वह प्रक्रिया है जिसमें जल से पितरों की प्यास बुझाई जाती है। कर्ता अंजलि में शुद्ध जल, कुशा और काले तिल लेकर, दक्षिण की ओर मुख कर, पितरों के गोत्र-नाम का उच्चारण करते हुए, अंगूठे के मूल भाग पितृ तीर्थ से तस्मै स्वधा नमः मंत्र के साथ जल गिराता है।

#तर्पण#जल अर्पण#पितरों की प्यास
श्राद्ध विधि

अपसव्य का अर्थ क्या है?

अपसव्य वह अवस्था है जिसमें जनेऊ दाएं कंधे पर और बाएं हाथ के नीचे रखा जाता है। यह पितृ कार्य अर्थात् श्राद्ध, तर्पण और पिण्डदान के समय की विशेष अवस्था है। अप विपरीत और सव्य बाएं से बना यह शब्द है, अर्थात् सव्य का उलट या दाएं ओर। यह देव कार्य की सव्य अवस्था से भिन्न है।

#अपसव्य#जनेऊ अवस्था#पितृ कार्य
श्राद्ध परिचय

श्राद्ध शब्द का अर्थ क्या है?

'श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम्' = श्रद्धा से जो दिया जाए वही श्राद्ध। पितरों को अन्न/जल/पिण्ड/तर्पण श्रद्धा-आस्तिकता से अर्पण = श्राद्ध। मूल तत्त्व 'श्रद्धा' है।

#श्राद्ध#व्युत्पत्ति#अर्थ
श्राद्ध परिचय

श्राद्ध क्या होता है?

श्राद्ध = पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक अन्न, जल, पिण्ड, तर्पण अर्पण। 'श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम्'। तीन ऋणों (देव, ऋषि, पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र शास्त्र-सम्मत मार्ग। सनातन धर्म का सबसे पवित्र अनुष्ठान।

#श्राद्ध#परिभाषा#अर्थ
लोक

पितृ पक्ष कब आता है और इसका महत्व क्या है?

भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष होता है, जब पितृलोक पृथ्वी के निकट माना जाता है।

#पितृ पक्ष#महालय#श्राद्ध
लोक

तर्पण का शाब्दिक अर्थ क्या है?

तर्पण का अर्थ है पितरों को जल, तिल और मंत्रों से तृप्त करना।

#तर्पण अर्थ#पितृ तृप्ति#श्राद्ध
लोक

प्रेत पिण्ड को पितृ पिण्डों में मिलाने का अर्थ क्या है?

प्रेत पिण्ड का पितृ पिण्डों में मिलना मृतात्मा के पितृ मंडल में प्रवेश का संकेत है।

#प्रेत पिण्ड#पितृ पिण्ड#सपिण्डीकरण
लोक

7 पीढ़ी पितृ तर्पण क्या है?

7 पीढ़ी पितृ तर्पण में कर्ता अपने पितृकुल की छह ऊर्ध्व पीढ़ियों को पिण्ड और लेप के माध्यम से तृप्त करता है।

#7 पीढ़ी पितृ तर्पण#श्राद्ध#पितृ ऋण
लोक

विश्वेदेव कौन हैं?

विश्वेदेव पितृ-कर्म के रक्षक, साक्षी और मार्गदर्शक देव हैं।

#विश्वेदेव#श्राद्ध#पितृकर्म
लोक

नान्दीमुख पितर कौन हैं?

नान्दीमुख पितर मांगलिक कार्यों में प्रसन्न और आह्लादित रूप में आहूत पितर हैं।

#नान्दीमुख पितर#वृद्धिश्राद्ध#मांगलिक कार्य
लोक

लेपभाज् पितर कौन हैं?

लेपभाज् चतुर्थ, पञ्चम और षष्ठ पीढ़ी के पितर हैं, जिन्हें पूर्ण पिण्ड नहीं बल्कि अन्न का लेप मिलता है।

#लेपभाज्#चतुर्थ पीढ़ी#पञ्चम पीढ़ी
लोक

पिण्डभाज् पितर कौन हैं?

पिण्डभाज् पितर पिता, पितामह और प्रपितामह हैं, जिन्हें श्राद्ध में प्रत्यक्ष पूर्ण पिण्ड दिया जाता है।

#पिण्डभाज्#पिता#पितामह
लोक

सात पीढ़ियों का सापिण्ड्य संबंध क्या है?

सापिण्ड्य में १ कर्ता, ३ पिण्डभाज् और ३ लेपभाज् मिलकर ७ पीढ़ियों का संबंध बनाते हैं।

#सापिण्ड्य#सात पीढ़ी#पिण्डभाज्
लोक

पितृ ऋण का आनुवंशिक आधार क्या है?

पितृ ऋण का आधार यह है कि शरीर के पैतृक ५६ अंशों में ४६ अंश पहली तीन पीढ़ियों से आते हैं।

#पितृ ऋण#आनुवंशिक आधार#84 अंश
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