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विस्तृत उत्तर
सात पीढ़ियों का सापिण्ड्य संबंध यजमान और उसके पितरों के श्राद्ध तथा पारिवारिक धर्म से जुड़ा संबंध है। इसमें १ कर्ता, ३ पिण्डभाज् पितर और ३ लेपभाज् पितर सम्मिलित माने जाते हैं। पिता, पितामह और प्रपितामह पिण्डभाज् हैं, जिन्हें प्रत्यक्ष पिण्ड दिया जाता है। चतुर्थ, पञ्चम और षष्ठ पीढ़ी लेपभाज् हैं, जिन्हें पिण्ड बनाते समय हाथ में लगे अन्न का लेप भाग मिलता है। इस प्रकार ७ पीढ़ियों का पूर्ण सापिण्ड्य संबंध बनता है, जो विवाह और सूतक-पातक के नियमों का भी आधार है।
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