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विस्तृत उत्तर
लेपभाज् पितर चतुर्थ, पञ्चम और षष्ठ पीढ़ी के पूर्वज हैं, जैसे वृद्ध-प्रपितामह आदि। इन्हें प्रत्यक्ष पूर्ण पिण्ड नहीं दिया जाता। पिण्ड बनाते समय यजमान के हाथ में जो अन्न का लेप लगा रह जाता है, उसे दर्भ पर पोंछ दिया जाता है और यही लेप इन तीन उच्चतर पीढ़ियों का भाग माना जाता है। इसी कारण इन्हें लेपभाज् या लेपभागिन् कहा जाता है। ये पितर पिण्डभाज् से ऊपर की सूक्ष्म श्रेणी में आते हैं।
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