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क्या है

समाधि क्या है?(8)

समाधि का अर्थसमाधि क्या है?समाधि का महत्व
सरल उत्तर

समाधि के समीप पहुँचकर अज्ञान के कारण अनात्म पदार्थों में आत्मज्ञान रूप विपरीत ज्ञान रखना भ्रान्तिदर्शन है।

स्रोत प्रश्न: भ्रान्तिदर्शन क्या होता है? →
योग बाधाएँ

भ्रान्तिदर्शन क्या होता है?

समाधि के समीप पहुँचकर अज्ञान के कारण अनात्म पदार्थों में आत्मज्ञान रूप विपरीत ज्ञान रखना भ्रान्तिदर्शन है।

#भ्रान्तिदर्शन#विपरीत ज्ञान#अनात्म
अष्टांग योग

अष्टांग योग क्या होता है?

अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।

#अष्टांग योग#यम#नियम
चक्र शोधन और कुंडलिनी जागरण

सहस्रार चक्र का बीज मंत्र क्या है?

सहस्रार चक्र का बीज मंत्र 'ॐ' या मौन है — यह मस्तिष्क के शिखर पर स्थित, परमतत्त्व से संबद्ध है। साधना से समाधि, ब्रह्म-ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति होती है।

#सहस्रार चक्र#ॐ या मौन#समाधि
असाध्य रोग निवारण और विशेष प्रयोग

111 श्वासों की विधि क्या है?

विज्ञान भैरव तंत्र की तकनीक: 111 श्वासों तक सजग रहकर श्वास की गति पर ध्यान केंद्रित करें — इससे चेतना स्थिर होती है और समाधि के निकट पहुँचा जाता है।

#111 श्वास#विज्ञान भैरव तंत्र#आंतरिक यज्ञ
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में ध्यान का महत्व क्या है?

उपनिषदों में ध्यान ब्रह्म-साक्षात्कार की प्रत्यक्ष विधि है। छान्दोग्य (7/6) — 'ध्यानं वाव चित्तात्भूयः' — ध्यान चित्त से भी श्रेष्ठ है। माण्डूक्य में 'तुरीय' अवस्था ध्यान की परिणति है। कठोपनिषद (2/24) कहता है — आत्मा बुद्धि से नहीं, एकाग्र ध्यान से मिलती है।

#ध्यान#उपनिषद#माण्डूक्य
वेद ज्ञान

वेदों में ध्यान का महत्व क्या है?

वेदों में 'धी' (ध्यान-बुद्धि) की उपासना केन्द्रीय है। गायत्री मंत्र बुद्धि को प्रेरित करने की प्रार्थना है। नासदीय सूक्त (10/129) में तप (ध्यान) को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है। वेद-मंत्रों का मनन ही वैदिक ध्यान का मूल रूप है।

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गीता दर्शन

गीता में ध्यान का महत्व क्या है?

गीता अध्याय 6 (ध्यानयोग) के अनुसार नित्य ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है (6/15)। चंचल मन को बार-बार आत्मा में वापस लाना ही ध्यान का अभ्यास है। ध्यान का प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

#ध्यान#गीता#अध्याय 6
योग दर्शन

योग क्या है?

पतंजलि के अनुसार 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' — चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है। यह शरीर, मन और आत्मा को साधने की समग्र पद्धति है जिसके आठ अंग हैं — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।

#योग#पतंजलि#अष्टांग योग
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