अविद्यापंचपर्वा अविद्या क्या है?पंचपर्वा अविद्या वे पांच अविद्याएँ हैं जो ब्रह्मा से पहले उत्पन्न हुईं: तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र।#पंचपर्वा अविद्या#अविद्या#तम
लोकतमस मोह महा मोह क्या हैतमस् देह-अज्ञान, मोह ममता और महा-मोह भोग-विलास की अंधी आसक्ति है।#तमस्#मोह#महा मोह
लोकअंध तामिस्र क्या हैअंध-तामिस्र शरीर को ही सब कुछ मानने से उत्पन्न मृत्यु-भय है।#अंध तामिस्र#मृत्यु भय#अविद्या
लोकतामिस्र क्या हैतामिस्र वह अज्ञान है जिसमें जीव ईर्ष्या, क्रोध और स्वतंत्र भोक्ता-भाव में फँसता है।#तामिस्र#अविद्या#क्रोध
शव साधना परिचयशव साधना का दार्शनिक आधार क्या है?तंत्र दर्शन: सम्पूर्ण ब्रह्मांड शिव-शक्ति का रूप है — पवित्र-अपवित्र का भेद अविद्या है। शव साधना उस साधक की परीक्षा है जो शव में भी शिव का दर्शन करता है।#दार्शनिक आधार#शिव शक्ति#द्वैत से परे
भक्ति एवं आध्यात्ममाया क्या है शंकराचार्य के अनुसार?शंकराचार्य के अनुसार माया वह अनिर्वचनीय शक्ति है जो ब्रह्म के एकमात्र सत्य को आच्छादित करके जगत की मिथ्या प्रतीति कराती है। ज्ञान से ही माया का पर्दा हटता है।#माया#शंकराचार्य#अद्वैत वेदांत
दर्शनमाया क्या है शंकराचार्य के अनुसार?माया = वह शक्ति जिससे एक ब्रह्म अनेक (जगत) दिखता है। न सत् न असत् — 'अनिर्वचनीय।' दो शक्तियाँ: आवरण (सत्य ढकना) और विक्षेप (भ्रम दिखाना)। जादूगर का जादू जैसी — ब्रह्म अप्रभावित। ब्रह्मज्ञान से माया नष्ट = मोक्ष।#माया#शंकराचार्य#अद्वैत