अष्टांग योगअष्टांग योग क्या होता है?अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।#अष्टांग योग#यम#नियम
चक्र शोधन और कुंडलिनी जागरणसहस्रार चक्र का बीज मंत्र क्या है?सहस्रार चक्र का बीज मंत्र 'ॐ' या मौन है — यह मस्तिष्क के शिखर पर स्थित, परमतत्त्व से संबद्ध है। साधना से समाधि, ब्रह्म-ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति होती है।#सहस्रार चक्र#ॐ या मौन#समाधि
असाध्य रोग निवारण और विशेष प्रयोग111 श्वासों की विधि क्या है?विज्ञान भैरव तंत्र की तकनीक: 111 श्वासों तक सजग रहकर श्वास की गति पर ध्यान केंद्रित करें — इससे चेतना स्थिर होती है और समाधि के निकट पहुँचा जाता है।#111 श्वास#विज्ञान भैरव तंत्र#आंतरिक यज्ञ
शास्त्र ज्ञानउपनिषद में ध्यान का महत्व क्या है?उपनिषदों में ध्यान ब्रह्म-साक्षात्कार की प्रत्यक्ष विधि है। छान्दोग्य (7/6) — 'ध्यानं वाव चित्तात्भूयः' — ध्यान चित्त से भी श्रेष्ठ है। माण्डूक्य में 'तुरीय' अवस्था ध्यान की परिणति है। कठोपनिषद (2/24) कहता है — आत्मा बुद्धि से नहीं, एकाग्र ध्यान से मिलती है।#ध्यान#उपनिषद#माण्डूक्य
वेद ज्ञानवेदों में ध्यान का महत्व क्या है?वेदों में 'धी' (ध्यान-बुद्धि) की उपासना केन्द्रीय है। गायत्री मंत्र बुद्धि को प्रेरित करने की प्रार्थना है। नासदीय सूक्त (10/129) में तप (ध्यान) को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है। वेद-मंत्रों का मनन ही वैदिक ध्यान का मूल रूप है।#ध्यान#वेद#धी
गीता दर्शनगीता में ध्यान का महत्व क्या है?गीता अध्याय 6 (ध्यानयोग) के अनुसार नित्य ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है (6/15)। चंचल मन को बार-बार आत्मा में वापस लाना ही ध्यान का अभ्यास है। ध्यान का प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।#ध्यान#गीता#अध्याय 6
योग दर्शनयोग क्या है?पतंजलि के अनुसार 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' — चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है। यह शरीर, मन और आत्मा को साधने की समग्र पद्धति है जिसके आठ अंग हैं — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।#योग#पतंजलि#अष्टांग योग