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विस्तृत उत्तर
अग्नि पुराण के अनुसार, जो मनुष्य दूसरों का धन हरते हैं और विशेष रूप से स्त्रियों, बालकों, वृद्धों तथा असहाय रोगियों के प्रति निर्दयतापूर्वक व्यवहार करते हुए उनकी संपत्ति छीनते हैं, वे मृत्यु के पश्चात पिशाच बनते हैं। ऐसा कर्म केवल धन-हरण नहीं है, बल्कि असहायों पर क्रूरता और निर्दयता भी है। इस कुटिल और अधर्मी आचरण के कारण सूक्ष्म शरीर पिशाच योनि में गिरता है, जो मलिन, हिंसक और तामसिक मानी गई है।
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