विस्तृत उत्तर
अतल लोक का वातावरण पृथ्वी से पूर्णतः भिन्न परंतु अत्यंत सम्मोहक है। शिव पुराण के पाताल वर्णन के अनुसार अतल लोक के सरोवरों और झीलों में अत्यंत सुंदर और सुगंधित कमल खिले रहते हैं। नदियों तथा झीलों का जल अमृत के समान मीठा और निर्मल होता है। यहाँ के उद्यानों में कोकिल आदि पक्षियों का मधुर कलरव गूंजता रहता है और वीणा, बांसुरी तथा मृदंग की मधुर ध्वनियां निरंतर वायु में प्रवाहित होती रहती हैं। यहाँ के निवासी अत्यंत दिव्य और सुगंधित लेप और स्वर्ण के आभूषण धारण करते हैं। यहाँ का वातावरण पूर्णतः दैहिक और भौतिक सुखों के अनुकूल है। नारद जी ने इस लोक का भ्रमण करके कहा था कि पाताल लोक का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी कहीं अधिक आनंददायक और श्रेष्ठ है।
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