विस्तृत उत्तर
बलराम जी का रसातल से संबंध उनके अनंत शेष स्वरूप से है। महाभारत के स्वर्गारोहण पर्व में वर्णन है कि जब यदुवंश का विनाश हुआ और श्रीकृष्ण ने अवतार लीला समाप्त करने का निर्णय लिया, तब बलराम जी प्रभास तीर्थ में समुद्र तट पर योग समाधि में बैठ गए। बलराम जी स्वयं भगवान अनंत शेष के अवतार थे। समाधि की अवस्था में उनके मुख से एक अत्यंत विशाल और दिव्य श्वेत नाग प्रकट हुआ। उस नाग ने महासागर में प्रवेश किया और सीधे रसातल की ओर प्रस्थान किया। वहाँ वरुण और प्रमुख नागों ने उसका स्वागत किया।
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