विस्तृत उत्तर
भगवान कृष्ण ने कालिय नाग का दमन यमुना के विषैले जल में प्रवेश करके किया। कालिय के विष से यमुना का जल उबल रहा था और आसपास के जीव, पक्षी तथा वृक्ष नष्ट हो गए थे। भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यकाल में उस विषैले जल में प्रवेश किया, कालिय नाग का कठोर दमन किया और उसके सहस्र फनों पर दिव्य नृत्य किया। इसे शास्त्रों में कालिय-मर्दन कहा गया है। जब कालिय मृत्यु के कगार पर पहुँच गया, तब उसकी पत्नियों ने भगवान की भावपूर्ण स्तुति की। श्रीकृष्ण ने उसे यमुना छोड़कर सपरिवार वापस पाताल लोकों, महातल, में जाने का आदेश दिया।
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