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विस्तृत उत्तर
चौथी पीढ़ी से पितरों का प्रत्यक्ष पिण्ड अधिकार समाप्त होकर लेप अधिकार आरंभ होता है। पिता, पितामह और प्रपितामह पिण्डभाज हैं, इसलिए उन्हें पूर्ण पिण्ड मिलता है। चौथी, पाँचवीं और छठी पीढ़ी लेपभाज हैं, इसलिए उन्हें कुश पर लगे अन्न के लेप से तृप्ति मिलती है। यह व्यवस्था दर्शाती है कि पीढ़ियों की दूरी बढ़ने पर पितृ संबंध सूक्ष्म होता जाता है, पर समाप्त नहीं होता।
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