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विस्तृत उत्तर
चित्रगुप्त को कायस्थ इसलिए कहा गया है क्योंकि वे ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न हुए। यमराज को ऐसे मेधावी लेखक की आवश्यकता थी जो सभी जीवों के शुभ-अशुभ कर्मों का ज्ञाता हो। इस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए ब्रह्मा जी ने १००० वर्षों तक घोर तपस्या की, जिसके परिणामस्वरूप उनके शरीर से एक अत्यंत तेजस्वी पुरुष प्रकट हुआ। ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण वे कायस्थ कहलाए।
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