विस्तृत उत्तर
गोमूत्र को शास्त्रों में 'महौषधि' कहा गया है। पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमय, गोमूत्र) में यह एक अनिवार्य घटक है और घर-शुद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली है।
शास्त्रीय महत्व: शास्त्रों में गोमूत्र को सभी प्रकार के दोष और अशुद्धि को दूर करने वाला माना गया है। किसी भी स्थान पर गोमूत्र का छिड़काव करने से वह स्थान धार्मिक दृष्टि से शुद्ध हो जाता है। विशेष पूजा और यज्ञ से पहले गोमूत्र छिड़कना अनिवार्य माना गया है।
वैज्ञानिक आधार: आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार गोमूत्र में सल्फर, अमोनिया, तांबा, लोहा, फॉस्फेट, सोडियम, कैल्शियम, विटामिन A-B-C-D-E और लैक्टोस शुगर जैसे पोषक तत्व होते हैं। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण हैं। यह हवा में रोगाणुओं को नष्ट करता है और वातावरण को रासायनिक रूप से शुद्ध करता है।
व्यावहारिक उपयोग: गोमूत्र को जल में मिलाकर पोंछा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। गोमूत्र में तुलसी-पत्र मिलाकर पवित्र करके छिड़कने से दूषित वातावरण शुद्ध होता है।