विस्तृत उत्तर
गोमय (गाय का गोबर) से घर की दीवारों और भूमि का लेपन करना हिन्दू परंपरा का अत्यंत प्राचीन अंग है। इसे पंचगव्य शुद्धि में प्रमुख स्थान दिया गया है।
शास्त्रीय आधार: शास्त्रों में गाय को माँ लक्ष्मी का प्रतीक और सभी देवताओं का वास-स्थान माना गया है। गोमय में भी यही दिव्य गुण समाहित हैं। पूजा से पहले पूजा-स्थल पर गोमय का लेपन करने से वह स्थान देवताओं के बैठने योग्य शुद्ध हो जाता है।
वैज्ञानिक आधार: गाय के गोबर में कार्बोलिक एसिड और अनेक एंटीमाइक्रोबियल तत्व होते हैं जो जीवाणुओं को नष्ट करते हैं। शोध में पाया गया है कि गोमय लेपन से विकिरण (radiation) को अवशोषित करने की क्षमता होती है। यह घर की दीवारों और भूमि को शीतल, स्वच्छ और जीवाणु-मुक्त रखता है।
व्यावहारिक उपयोग: यज्ञ और विशेष पूजा से पहले आँगन और पूजा-स्थल का गोमय-लेपन करना परंपरागत है। छोटे-छोटे गोमय के उपले जलाने से वातावरण शुद्ध होता है। आधुनिक जीवन में जहाँ सीधा लेपन संभव न हो वहाँ गोमय-जल से पोंछा लगाया जा सकता है।
