विस्तृत उत्तर
जनेऊ बदलने की एक निश्चित मंत्र-विधि शास्त्रों में वर्णित है। जनेऊ बदलने का सर्वोत्तम अवसर श्रावणी पूर्णिमा (रक्षाबंधन) का दिन होता है जिसे 'उपाकर्म' भी कहते हैं।
नया जनेऊ धारण करने का मंत्र:
'ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं,
प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं,
यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥'
इस मंत्र का अर्थ है — 'यह यज्ञोपवीत परम पवित्र है जो प्रजापति (ब्रह्मा) के साथ पहले से ही उत्पन्न हुआ है। यह आयु और श्रेष्ठता देने वाला, शुभ्र (सफेद और निर्मल) है। इस यज्ञोपवीत से मुझे बल और तेज प्राप्त हो।'
पुराना जनेऊ उतारने का मंत्र:
एतावद्दिनपर्यन्तं ब्रह्म त्वं धारितं मया।
जीर्णत्वात्त्वत्परित्यागो गच्छ सूत्र यथासुखम्॥'
इस मंत्र का अर्थ है — 'इतने दिनों तक मैंने तुम्हें धारण किया। अब जीर्ण (पुराना) हो जाने से तुम्हें छोड़ रहा हूँ — हे सूत्र, तुम सुखपूर्वक जाओ।'
जनेऊ कब बदलें — जब जनेऊ का कोई धागा टूट जाए, छह माह से अधिक पुराना हो जाए, परिवार में सूतक (जन्म या मृत्यु) हो, या प्राकृतिक कारणों से अपवित्र हो जाए।





