विस्तृत उत्तर
शालिग्राम को साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। यह नेपाल की गंडकी नदी में मिलने वाला एक विशेष काला पत्थर है। इसका जल 'महातीर्थ' माना गया है।
शास्त्रीय आधार: शास्त्रों में शालिग्राम को 'साक्षात् हरि' कहा गया है। पद्म पुराण में उल्लेख है कि शालिग्राम का जल पीने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। इसके जल से स्नान करने और पीने से समस्त पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
रोग-निवारण: शालिग्राम का जल पीने से रोगों के निवारण की मान्यता है। विशेष रूप से जीर्ण रोगों, मानसिक रोगों और अज्ञात कारण के रोगों में शालिग्राम-जल पीना फलदायी माना जाता है। इसके पीछे मान्यता यह है कि रोग कर्म-जनित होते हैं और शालिग्राम-सेवा से कर्म-दोष दूर होने से रोग भी शांत होते हैं।
वैज्ञानिक पक्ष: शालिग्राम एक अमोनाइट जीवाश्म (fossil) है जिसमें अनेक खनिज तत्व होते हैं। तांबे के पात्र में रखा शालिग्राम-जल उन खनिज तत्वों को जल में संक्रमित करता है।
उपयोग: शालिग्राम को नित्य पंचामृत से स्नान कराने के बाद उस पंचामृत को प्रसाद रूप में ग्रहण करें।





