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विस्तृत उत्तर
हिरण्याक्ष महर्षि कश्यप और दिति का अत्यंत बलशाली पुत्र था। उसने अपने बाहुबल के अहंकार में पृथ्वी को उसके अक्ष से विचलित कर रसातल के गहरे जल में डुबो दिया था। पृथ्वी के उद्धार और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु को वराह अवतार धारण करना पड़ा। एक भयंकर युद्ध के बाद भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध किया। वायु पुराण के अनुसार हिरण्याक्ष के वंशजों और उसके नाम पर स्थापित समृद्ध नगरों का संबंध महातल लोक से बताया गया है।
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