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विस्तृत उत्तर
जनलोक महर्लोक के ऊपर स्थित है। पुराणों के अनुसार ध्रुवलोक से एक करोड़ योजन ऊपर महर्लोक है और महर्लोक से दो करोड़ योजन ऊपर जनलोक स्थित है। महर्लोक प्रलय की अग्नि से सीधे जलकर नष्ट नहीं होता, परंतु उसका ताप वहाँ तक पहुँच जाता है। ऐसे समय महर्लोक के निवासी जनलोक में आश्रय लेते हैं।
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