विस्तृत उत्तर
श्रीसूक्त के गहन अध्ययन से एक अत्यंत वैज्ञानिक और लौकिक सत्य उद्घाटित होता है। कर्दम ऋषि का शाब्दिक और प्रतीकात्मक अर्थ 'गीली मिट्टी' या 'कीचड़' है।
श्रीसूक्त के ग्यारहवें मंत्र में प्रार्थना की गई है कि हे कर्दम! आप मेरे घर में निवास करें और अपनी माता लक्ष्मी को भी मेरे कुल में स्थापित करें। कमल कीचड़ (कर्दम) में ही खिलता है।
विष्णु पुराण और श्रीसूक्त की व्याख्याओं के अनुसार, कर्दम ऋषि के कठोर तप से प्रसन्न होकर लक्ष्मी उनके घर पुत्री रूप में प्रकट हुईं।
इसका द्वितीयक दार्शनिक और आर्थिक अर्थ यह है कि भूमि तत्त्व, उपजाऊ मृदा और कृषि-स्थिरता के बिना श्री (समृद्धि) का वास नहीं होता। जिस राष्ट्र या समाज में भूमि (कर्दम) का सम्मान और संरक्षण होता है, वहीं लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करती हैं।





