विस्तृत उत्तर
चिक्लीत का अर्थ है 'नमी' या 'जल तत्त्व'।
श्रीसूक्त के बारहवें मंत्र में साधक प्रार्थना करता है कि हे चिक्लीत! आप मेरे घर में निवास करें और अपनी माता लक्ष्मी को भी यहाँ स्थायी रूप से बसा लें।
यह मंत्र स्पष्ट करता है कि जहाँ चिक्लीत (नमी, जल, रस) है, वहीं लक्ष्मी (समृद्धि) है।
कृषि आधारित वैदिक अर्थव्यवस्था में भूमि (कर्दम) और जल (चिक्लीत) का उचित अनुपात ही वास्तविक संपदा को जन्म देता है। यह वैदिक रूपक अत्यंत सूक्ष्मता से स्थापित करता है कि भौतिक समृद्धि वायुमंडल से नहीं टपकती, बल्कि वह पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र, उर्वरता, जल और भूमि के उचित संतुलन से ही उत्पन्न होती है।





