विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में माता लक्ष्मी के अठारह पुत्रों का भी उल्लेख मिलता है, जो मानव जीवन में समृद्धि के अठारह विभिन्न आयामों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इन अठारह पुत्रों के नाम इस प्रकार हैं: देवसख, चिक्लीत, आनंद, कर्दम, श्रीप्रद (श्रीद), जातवेद, अनुराग, संवाद, विजय, वल्लभ, मद, हर्ष, बल, तेज, दमक, सलिल, गुग्गुल, और कुरुंक।
इन नामों का यदि विश्लेषण किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि ये सभी मानव मनोविज्ञान और समाज के सकारात्मक भाव हैं। उदाहरणार्थ, 'आनंद' (प्रसन्नता), 'अनुराग' (प्रेम), 'संवाद' (उत्तम संचार/परस्पर समझ), 'बल' (शक्ति), और 'हर्ष' (उत्साह) के बिना कोई भी धन या संपत्ति व्यर्थ है।
इन अठारह गुणों या पुत्रों का आह्वान करने का अर्थ है उस समग्र वातावरण का निर्माण करना जिसमें लक्ष्मी निवास कर सकें।





