कुंडलिनीतंत्र में मणिपूर चक्र को कैसे जागृत करें?तीसरा — 10 दल, पीला, अग्नि, बीज 'रं'। 'ॐ रं जाग्रनय ह्रीं मणिपुर रं ॐ फट'। कपालभाति/नौली। लक्षण: 'आत्मविश्वास, बुद्धि, सही निर्णय।' अग्नि=तीव्र। गुरु।#मणिपुर#चक्र#जागृत
कुंडलिनीकुंडलिनी जागरण से पहले कैसे तैयारी करें?शारीरिक: सिद्धासन, नाड़ी शोधन, बंध, सात्विक (6-12 मास)। मानसिक: ध्यान 20-30, यम-नियम, भय नाश। आध्यात्मिक: गुरु (सबसे महत्वपूर्ण), दीक्षा। 'जल्दबाजी=खतरा। नींव मजबूत।'#कुंडलिनी#तैयारी#पहले
कुंडलिनीतंत्र में मूलाधार चक्र को कैसे सक्रिय करें?बीज 'ॐ लं' 108, मूलबंध (contract+release), सिद्धासन (एड़ी दबाव), लाल त्रिकोण ध्यान, कपालभाति। लक्षण: स्थिरता, अभय, ऊर्जा। धीरे-धीरे। गुरु उत्तम।#मूलाधार#चक्र#सक्रिय
कुंडलिनीतंत्र में कुंडलिनी जागरण की विधि क्या है?मंत्र योग, हठ योग (आसन+प्राणायाम+बंध), राज योग (ध्यान), शक्तिपात (गुरु), तांत्रिक। मूलाधार→6 चक्र→सहस्रार = मोक्ष। गुरु अनिवार्य — बिना = खतरनाक।#कुंडलिनी#जागरण#विधि
कुंडलिनीतंत्र में स्वाधिष्ठान चक्र की साधना कैसे करें?दूसरा चक्र — 6 दल, नारंगी, जल, बीज 'वं'। 'ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय...'। लक्षण: इन्द्रिय नियंत्रण, रचनात्मकता। सावधानी: अहंकार। गुरु।#स्वाधिष्ठान#चक्र#साधना
कुंडलिनीतंत्र में चक्र भेदन कैसे किया जाता है?षट्चक्र भेदन। प्राणायाम→बंध→बीज जप (लं/वं/रं/यं/हं/ॐ)। जागरण मंत्र। क्रमशः (मूलाधार→ऊपर)। अनाहत=वासना मुक्त, आज्ञा=आत्मज्ञान। गुरु अनिवार्य।#चक्र भेदन#कुंडलिनी#षट्चक्र