नित्य कर्मभोजन शुद्धि का मंत्रभोजन ग्रहण करने से पूर्व अन्न के दोषों को नष्ट करने और उसे प्रसाद बनाने के लिए गीता के श्लोक 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ...' का उच्चारण करना चाहिए।#भोजन#अन्न दोष#शुद्धि
नित्य कर्मरात को सोने का मंत्रबिस्तर पर लेटकर उन पांच महान ऋषियों का स्मरण करना चाहिए जिन्हें सुखपूर्वक सोने का वरदान प्राप्त था। इसके लिए 'अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो...' श्लोक का मानसिक जप सर्वोत्तम है।#निद्रा#शयन#मानसिक शांति
नित्य कर्मसुबह उठने के बाद का मंत्रप्रातःकाल आंख खुलते ही दोनों हथेलियों के दर्शन करते हुए 'कराग्रे वसते लक्ष्मीः...' श्लोक का उच्चारण करना चाहिए। यह दिनभर के कर्मों में धन, विद्या और सफलता सुनिश्चित करता है।#दिनचर्या#प्रातः काल#कर दर्शन
नित्य कर्मतर्पण और मार्जन के मंत्र और उनकी विधितर्पण का अर्थ देवताओं या पितरों को जल देकर तृप्त करना है ('अमुक देवतां तर्पयामि')। मार्जन का अर्थ मंत्रोच्चार के साथ स्वयं पर जल छिड़ककर शारीरिक और सूक्ष्म शुद्धि करना है। दोनों अनुष्ठान के अनिवार्य अंग हैं।#तर्पण#मार्जन#शुद्धि
नित्य कर्मनींद न आने की समस्या के लिए शांति मंत्रगहरी और शांत नींद के लिए बिस्तर पर लेटकर 'अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो...' श्लोक का मानसिक स्मरण करना चाहिए, जो मन के भटकाव को रोककर तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।#अनिद्रा#शांति मंत्र#निद्रा
नित्य कर्मअन्नपूर्णा मंत्र भोजन से पहलेभोजन से पूर्व 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' मंत्र का उच्चारण करने से अन्न के दोष नष्ट होते हैं, भोजन प्रसाद बन जाता है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।#अन्नपूर्णा#भोजन#कृतज्ञता
नित्य कर्मभोजन के बाद जपने वाला अगस्त्य मंत्र कौन सा है और इसके क्या लाभ हैंभोजन के बाद महर्षि अगस्त्य के मंत्र का जप करते हुए पेट पर हाथ फेरने से पाचन शक्ति बढ़ती है।#भोजन#पाचन#अगस्त्य