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विस्तृत उत्तर
क्रौञ्चपुर यममार्ग की 16 मध्यवर्ती पुरियों में छठा नगर है। आत्मा पाँचवें मास में यहाँ पहुँचती है और परिजनों द्वारा दिए गए श्राद्ध पिण्ड को ग्रहण करती है। प्रत्येक नगर में आत्मा को लगभग आधा मुहूर्त विश्राम मिलता है। वह मासिक श्राद्ध का पिण्ड खाकर क्षणिक संतृप्ति अनुभव करती है, फिर यमदूतों के तर्जन और प्रहार से आगे बढ़ती है।
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