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विस्तृत उत्तर
बिल्कुल नहीं। धर्मशास्त्रों में स्पष्ट है कि सात्विक साधकों और गृहस्थों के लिए मदिरापान या घर के मंदिर में मदिरा (शराब) का भोग लगाना 'महापातक' (घोर पाप) और वर्जित है। मदिरा (तामसिक वाम मार्गी साधना) केवल अघोरियों और दीक्षित तांत्रिकों के लिए होती है। गृहस्थों को 'अनु कल्प' (विकल्प) के रूप में नारियल पानी, शहद या अदरक का रस 'शिवार्पण' भाव से भगवान को अर्पित करना चाहिए।
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