विस्तृत उत्तर
महातल लोक और नरक लोक में स्पष्ट अंतर है। महातल सात पातालों में पांचवां बिल-स्वर्ग है, जहाँ स्वर्ग से भी अधिक भौतिक सुख, संपदा, विलासिता और ऐश्वर्य उपलब्ध है। यहाँ शक्तिशाली नाग, दैत्य और भोग-संपन्न निवासी रहते हैं। इसके विपरीत नरक लोक पाताल से भी नीचे, गर्भोदक सागर के ऊपर और दक्षिण दिशा में पितृलोक के समीप स्थित हैं। वहाँ घोर पापी जीवात्माएं यमराज के कठोर दंड का विधान भुगतती हैं। श्रीमद्भागवत में तामिस्र, अन्धतामिस्र, रौरव, कुम्भीपाक और असिपत्रवन आदि नरकों का वर्णन यातना-स्थानों के रूप में है।
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