विस्तृत उत्तर
कौषीतकि ब्राह्मण उपनिषद के प्रथम अध्याय में सत्यलोक की दो विशेष प्रकार की अप्सराओं का वर्णन है — मानसी और चाक्षुषी। मानसी का अर्थ है मन से उत्पन्न या मानसिक और चाक्षुषी का अर्थ है दृष्टि से उत्पन्न। ये दोनों प्रकार की अप्सराएँ सत्यलोक में निरन्तर पुष्पों से लोकों का ताना-बाना बुनती रहती हैं। यह एक गहरा प्रतीकात्मक वर्णन है — मानसी अप्सराएँ मन की शक्ति से और चाक्षुषी अप्सराएँ दृष्टि की शक्ति से ब्रह्माण्ड की रचना में सहयोग करती हैं। इन्हीं के साथ पाँच सौ अन्य अप्सराएँ भी हैं जो ब्रह्मज्ञानी जीव के आगमन पर माला, लेप, आभूषण, वस्त्र और सुगंध लेकर उसका स्वागत करती हैं।
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