विस्तृत उत्तर
मंत्र-सिद्धि के संदर्भ में 'सबसे शक्तिशाली मंत्र' का प्रश्न अत्यंत सूक्ष्म है — शास्त्र इसका उत्तर व्यक्ति-सापेक्ष देते हैं:
कुलार्णव तंत्र (14.50) — मूल सिद्धांत
नास्ति मंत्रस्य वैषम्यं साधकस्य तु वैषम्यम्।
— मंत्रों में कोई भेद नहीं — भेद साधक में है। जो मंत्र साधक के लिए उचित हो, वही उसके लिए सर्वशक्तिशाली है।
सिद्धि-साधना में मान्यता-प्राप्त प्रमुख मंत्र
1ॐ (प्रणव) — सर्वोच्च बीज
माण्डूक्य उपनिषद: 'ॐ इत्येतदक्षरमिदं सर्वम्।' — ॐ ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड है। सभी मंत्रों का मूल। किसी भी साधना में ॐ का उपयोग उसे प्रबल बनाता है।
2गायत्री मंत्र — 'सर्व मंत्राणां जननी'
सभी मंत्रों की माता। यह सिद्ध होने पर सभी विद्याएं सुलभ होती हैं।
3महामृत्युंजय मंत्र — संकट-निवारण में
मृत्यु, रोग, और अपमृत्यु के भय से मुक्ति के लिए यह सर्वश्रेष्ठ।
4इष्टदेव का मूल मंत्र (व्यक्ति-सापेक्ष सर्वोच्च)
मंत्रमहार्णव: 'स्वेष्टदेवतामंत्रः सर्वोत्कृष्टः।' — अपने इष्टदेवता का मंत्र — वही साधक के लिए सर्वशक्तिशाली।
जैसे — विष्णु-भक्त के लिए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और शक्ति-साधक के लिए पंचदशी मंत्र।
5गुरु-दत्त मंत्र — सर्वोच्च व्यावहारिक शक्ति
भागवत (6.3.22) और कुलार्णव दोनों एकमत हैं — गुरु से दीक्षित मंत्र ही सर्वाधिक शक्तिशाली है, चाहे वह सरल हो या जटिल।
सिद्धि-साधना में विशेष
तंत्रालोक: सिद्धि-साधना में मंत्र तीन प्रकार से सशक्त होता है:
- 1सिद्ध मंत्र — जो गुरु-परंपरा में सिद्ध हो चुका हो
- 2दीक्षित मंत्र — जो गुरु से प्राप्त हो
- 3जीवित मंत्र — जिसे साधक वर्षों से जप रहा हो
निष्कर्ष
सर्वशक्तिशाली मंत्र = गुरु-दत्त + इष्टदेव का + नित्य जपित। केवल 'कठिन' या 'रहस्यमय' मंत्र शक्तिशाली नहीं होता।
