विस्तृत उत्तर
हिंदू शास्त्रों के अनुसार पाप और पुण्य का लेखा-जोखा चित्रगुप्त रखते हैं, और न्याय यमराज करते हैं।
चित्रगुप्त
- ▸पद्म पुराण और गरुड़ पुराण के अनुसार चित्रगुप्त ब्रह्मा जी के शरीर से उत्पन्न हुए।
- ▸वे यमराज के सभा में बैठकर प्रत्येक जीव के कर्मों का लेखा रखते हैं।
- ▸'चित्र' = चित्र/छवि, 'गुप्त' = छिपा हुआ — अर्थात् वे हर कर्म की गुप्त छवि (रिकॉर्ड) रखते हैं।
- ▸मृत्यु के बाद चित्रगुप्त यमराज के समक्ष जीव का कर्म लेखा प्रस्तुत करते हैं।
यमराज (धर्मराज)
- ▸यमराज को 'धर्मराज' भी कहा जाता है — वे न्यायाधीश हैं।
- ▸चित्रगुप्त के लेखे के आधार पर यमराज कर्मफल का निर्णय करते हैं — स्वर्ग, नरक या पुनर्जन्म।
वेदांत दृष्टिकोण
- ▸अद्वैत वेदांत और भगवद्गीता के अनुसार कर्मफल की व्यवस्था ईश्वर (परमात्मा) स्वयं करते हैं — आदि शंकराचार्य ने ब्रह्मसूत्र भाष्य में कहा कि कर्म स्वयं फल नहीं दे सकता, एक सचेत ईश्वर (ईश्वर) कर्मफल का प्रबंधन करता है।
सूक्ष्म शरीर में कर्म संस्कार
- ▸योग दर्शन और सांख्य के अनुसार कर्म सूक्ष्म शरीर (कारण शरीर) में संस्कारों के रूप में संचित होते रहते हैं — यह स्वचालित प्रक्रिया है।





