विस्तृत उत्तर
पाताल लोक को बिल-स्वर्ग इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ का ऐश्वर्य, सुख-सुविधाएं और भोग-विलास देवताओं के स्वर्ग से भी अधिक उन्नत और उत्कृष्ट हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार इन बिल-स्वर्गों में रहने वाले दैत्य, दानव और नाग गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हैं। यहाँ स्वर्ग से भी अधिक काम-भोग, ऐश्वर्य, आनंद और विभूति उपलब्ध है। यहाँ के भवन, उद्यान और क्रीड़ा-स्थल अत्यंत समृद्ध हैं। निवासी अपनी पत्नी, पुत्र, बंधु-बांधव और अनुचरों के साथ सदा प्रमुदित और अनुरक्त रहते हैं। उनकी कामनाएं देवताओं से भी अधिक अबाधित होती हैं और वे माया के सुखों में आनंदित रहते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





