विस्तृत उत्तर
हिंदू धर्मशास्त्रों में मृत्यु के उपरांत अंत्येष्टि, दशगात्र विधान, षोडश श्राद्ध और सपिण्डीकरण का अत्यंत महत्व है। गरुड़ पुराण सारोद्धार में कहा गया है कि जो लोग पिण्डदान से वंचित रह जाते हैं, वे प्रेत रूप हो जाते हैं और कल्प के अंत तक निर्जन वनों में अत्यधिक दुखी होकर भटकते रहते हैं। यदि मृत व्यक्ति का विधिपूर्वक श्राद्ध न किया जाए, तो वह अपने ही परिजनों को शाप देता है। ब्रह्मांड पुराण में भी चेतावनी दी गई है कि जो नास्तिक या अज्ञानी श्राद्ध कर्म नहीं करते, वे पतन को प्राप्त होते हैं और उनका मृत परिजन प्रेत बनकर कष्ट भोगता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक