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दीप विधि📜 अग्नि पुराण, पद्म पुराण — दीप महात्म्य, धर्म सिंधु, स्कंद पुराण3 मिनट पठन

पूजा में दीपक कैसे जलाएं?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा में घी का दीप सर्वोत्तम है। दीप देवता के दाहिनी ओर रखें। बत्ती देवता की ओर हो। दीप जलाते समय मंत्र बोलें। फूँक मारकर दीप न बुझाएं। संध्याकाल दीप जलाने से घर में लक्ष्मी का वास होता है। शनि-हनुमान के लिए तिल/सरसों तेल, हनुमान के लिए चमेली तेल विशेष।

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विस्तृत उत्तर

दीप जलाने की विधि और महत्व अग्नि पुराण और पद्म पुराण में विस्तार से वर्णित है:

दीप का महत्व

दीप अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाले ज्ञान का प्रतीक है। अग्नि पुराण में कहा गया है —

दीपो ज्ञानस्वरूपो हि ब्रह्मणः साक्षात् स्वरूपम्।' — दीप साक्षात् ज्ञान का और ब्रह्म का स्वरूप है।

दीप के प्रकार

| दीप | तेल/घी | देवता | विशेष फल |

|-----|---------|--------|------------|

| घी दीप | गाय का घी | सभी देवता | ज्ञान, सात्विकता |

| तिल तेल दीप | काला तिल तेल | शनि, काली, भैरव | शनि दोष निवारण |

| सरसों तेल दीप | सरसों | हनुमान, शिव | शत्रु नाश, रक्षा |

| चमेली तेल दीप | चमेली | हनुमान | बल, भक्ति |

| अरंडी तेल दीप | अरंडी | देवी, काली | तांत्रिक पूजा |

| कपूर | कपूर | सभी | वायु शुद्धि, नकारात्मकता नाश |

दीप जलाने की सही विधि

1बत्ती तैयार करना

रुई की बत्ती को घी में भिगोकर दीपक में रखें। बत्ती देवता की ओर होनी चाहिए।

2दीप जलाते समय मंत्र

> 'भो दीप देवरूपस्त्वं कर्मसाक्षी ह्यविघ्नकृत्।

> यावत्कर्म समाप्तिः स्यात् तावत् त्वं सुस्थिरो भव।'

— हे दीप! आप देवरूप हैं, कर्म के साक्षी हैं। जब तक पूजा पूरी न हो, स्थिर रहें।

3दीप का स्थान

  • देवता के दाहिनी ओर रखें (श्रेष्ठ)
  • या सामने
  • जमीन पर न रखें — चौकी या थाली पर

4बत्तियों की संख्या

  • 1 बत्ती — नित्य पूजा
  • 2 बत्ती — मांगलिक कार्य
  • 5 बत्ती (पंचमुखी) — आरती, विशेष पूजा
  • 7 बत्ती — महापूजा, अनुष्ठान

5दीप कभी न बुझाएं

फूँक मारकर दीप न बुझाएं — हाथ से पंखा करके या अंगुली और अंगूठे से बुझाएं।

संध्या दीप का महत्व

स्कंद पुराण: 'संध्याकाले तु यो दीपं ज्वालयेत् भक्तिमान् नरः। गृहे तस्य सदा लक्ष्मीः वसति नित्यं नारायणः।' — जो सायंकाल भक्ति से दीप जलाता है, उसके घर में लक्ष्मी और नारायण का वास होता है।

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शास्त्रीय स्रोत
अग्नि पुराण, पद्म पुराण — दीप महात्म्य, धर्म सिंधु, स्कंद पुराण
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