विस्तृत उत्तर
महाराजा बलि दैत्यराज विरोचन के पुत्र और महान भगवद-भक्त प्रह्लाद महाराजा के पौत्र हैं। उनका जन्म दैत्य अर्थात असुर कुल में हुआ था, लेकिन उनके भीतर अपने पितामह प्रह्लाद के समान परम वैष्णव गुण, क्षमा, दया, सत्यनिष्ठा और दानवीरता थी। वे असुरों और दानवों के राजा थे, किंतु उनका शासन धर्म, सत्य और ब्राह्मणों के प्रति अगाध श्रद्धा पर आधारित था। जब बलि ने अपने बाहुबल और ब्राह्मणों के आशीर्वाद से स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था, तब संपूर्ण त्रिलोकी में उनके जैसा दानवीर, सत्यवादी और प्रजापालक शासक कोई नहीं था। भगवान वामन के सामने उन्होंने अपना सर्वस्व समर्पित किया, और इसी पूर्ण आत्म-समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें सुतल लोक का अखंड राज्य प्रदान किया।
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