विस्तृत उत्तर
रसातल में किसी एक सर्वमान्य राजा या केंद्रीकृत शासक का वर्णन नहीं है। रसातल की प्रशासकीय व्यवस्था अन्य लोकों जैसी किसी एक शासक के अधीन नहीं है। यह स्वतंत्र, उग्र और युद्धप्रिय असुर कबीलों का निवास है, जो अपनी-अपनी मायावी नगरियों, जैसे हिरण्यपुर, के अधिपति हैं। निवातकवच, पणि और कालेय किसी देवता या शासक के अधीन रहना स्वीकार नहीं करते। तथापि वायु पुराण के अनुसार रसातल के कुछ क्षेत्रों पर प्रह्लाद और हेमका जैसे महान असुरों का आधिपत्य भी रहा है। शिव पुराण में तारकासुर और उसके वंशजों को भी रसातल के विशिष्ट क्षेत्रों का स्वामी बताया गया है। पर श्रीमद्भागवत पुराण स्पष्ट करता है कि इन असुरों की स्वच्छंदता पर वास्तविक अंकुश भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का है।
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