विस्तृत उत्तर
रसातल लोक की भूमि पथरीली, कंकड़-पत्थर युक्त और अश्ममयी बताई गई है। वायु पुराण, ब्रह्मांड पुराण और विष्णु पुराण में सात अधोलोकों की मिट्टी और भूमि की प्रकृति का वर्णन मिलता है। ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण के अनुसार रसातल की भूमि पथरीली या कंकड़-पत्थर युक्त है। विष्णु पुराण में महर्षि पराशर सात पाताल लोकों की भूमियों को क्रमशः श्वेत, कृष्ण, अरुण, पीत, शर्करा, अश्ममयी और सुवर्णमयी बताते हैं। इस क्रम में रसातल का धरातल कठोर और अश्ममयी है, जो वहाँ निवास करने वाले असुरों की कठोर, निष्ठुर और युद्धप्रिय प्रकृति के अनुकूल है।
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