विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के द्वितीय अंश, पंचम अध्याय में महर्षि पराशर ने सातों पातालों का स्पष्ट उल्लेख किया है। ये सात अधोलोक क्रमशः इस प्रकार हैं — पहला अतल, दूसरा वितल, तीसरा सुतल, चौथा तलातल (नितल या गभस्तिमत), पाँचवाँ महातल (महाख्यं), छठा रसातल और सातवाँ पाताल। विष्णु पुराण का संस्कृत श्लोक इसकी पुष्टि करता है — अतलं वितलं चैव नितलं च गभस्तिमत्, महाख्यं सुतलं चाग्र्यं पातालं चापि सप्तमम्। इन सातों पातालों में से प्रत्येक का विस्तार दस-दस हजार योजन है। इन सातों पातालों के नीचे तीस हजार योजन की दूरी पर भगवान शेषनाग (अनंत) गर्भोदक सागर में विराजमान हैं जो संपूर्ण ब्रह्मांड का भार अपने फनों पर धारण करते हैं।
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