विस्तृत उत्तर
सप्तधान्य सात प्रकार के अनाजों का समूह है जो कलश स्थापना में वेदी (मिट्टी के पात्र) में बोए जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से जौ, गेहूं, काले तिल, पीली सरसों आदि सम्मिलित होते हैं।
प्रत्येक अनाज का अपना विशिष्ट अर्थ है:
— जौ: उर्वरता और प्रचुरता का प्रतीक।
— पीली सरसों: पवित्रता के गुणों से युक्त।
— काले तिल: शुद्धिकरण के गुणों से युक्त।
दार्शनिक भावार्थ: बीज बोते समय साधक यह भावना करता है कि जिस प्रकार यह सुप्त बीज अंकुरित होकर पूर्णता और वृद्धि को प्राप्त करेगा, ठीक उसी प्रकार साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिकता का नव-विकास होगा।
