विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में 'सप्तमृत्तिका' (सात पवित्र स्थानों की मिट्टी) का विधान है, जो आध्यात्मिक वातावरण को शुद्ध करती है।
यह मिट्टी कलश स्थापना में उपयोग की जाने वाली स्वच्छ और पवित्र मृत्तिका के साथ सम्मिलित की जाती है। सप्तमृत्तिका का उपयोग वेदी (आधार पात्र) में सप्तधान्य बोने के लिए किया जाता है।




