विस्तृत उत्तर
वैदिक ब्रह्माण्ड विज्ञान के अनुसार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड चौदह लोकों में विभक्त है। इन चौदह लोकों को दो श्रेणियों में विभक्त किया गया है — सात ऊर्ध्व लोक और सात अधोलोक। ऊर्ध्व लोकों का आरोही क्रम इस प्रकार है — भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और इन सबके अन्त में सर्वोच्च शिखर पर स्थित सत्यलोक। इस प्रकार सत्यलोक सातों ऊर्ध्व लोकों में सबसे ऊँचा और समस्त चौदह लोकों में सर्वोच्च लोक है। आरम्भिक तीन लोकों (भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक) को सामूहिक रूप से त्रिलोक कहा जाता है जो मुख्य रूप से सकाम कर्मों और उनके फलों के उपभोग के क्षेत्र हैं। किन्तु इसके ऊपर के लोक क्रमशः विशुद्ध चेतना और तपस्या के क्षेत्र हैं और सत्यलोक इन सबका सर्वोच्च शिखर है।
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