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शिव पूजा📜 शिव पुराण, पद्म पुराण, रुद्राक्ष जाबालोपनिषद, देवी भागवत2 मिनट पठन

शिव के रुद्राक्ष कितने मुखी तक होते हैं और किसका क्या लाभ है?

संक्षिप्त उत्तर

रुद्राक्ष 1-21 मुखी (1-14 प्रचलित): 1=मोक्ष, 2=दाम्पत्य, 3=पाप नाश, 4=विद्या, 5=सर्वश्रेष्ठ (शांति-स्वास्थ्य), 6=वाक्, 7=धन, 8=विघ्न नाश, 9=शक्ति, 10=रक्षा, 11=साहस, 12=तेज, 13=सिद्धि, 14=तीसरा नेत्र। 'ॐ नमः शिवाय' से अभिमंत्रित। नकली से सावधान।

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विस्तृत उत्तर

रुद्राक्ष भगवान शिव के अश्रुओं (रुद्र + अक्ष = शिव के नेत्र/अश्रु) से उत्पन्न माने जाते हैं। ये 1 मुखी से लेकर 21 मुखी तक पाए जाते हैं, किन्तु 1 से 14 मुखी तक सर्वाधिक प्रचलित हैं।

प्रमुख रुद्राक्ष और उनके लाभ

  1. 11 मुखी: शिव स्वरूप। परम दुर्लभ। मोक्ष प्रदायक। सर्वोच्च आध्यात्मिक उन्नति।
  2. 22 मुखी: अर्धनारीश्वर। दाम्पत्य सुख। शिव-शक्ति एकता।
  3. 33 मुखी: अग्नि देव। पाप नाश। आत्मविश्वास वृद्धि।
  4. 44 मुखी: ब्रह्मा। विद्या-बुद्धि। छात्रों के लिए उत्तम।
  5. 55 मुखी (सर्वाधिक प्रचलित): कालाग्नि रुद्र। सर्व रोग नाश। मानसिक शांति। रक्तचाप नियंत्रण।
  6. 66 मुखी: कार्तिकेय। विद्या-ज्ञान। वाक्शक्ति।
  7. 77 मुखी: लक्ष्मी/सप्तमातृका। धन-समृद्धि। दरिद्रता नाश।
  8. 88 मुखी: गणेश। विघ्न नाश। सफलता।
  9. 99 मुखी: दुर्गा/नवदुर्गा। शक्ति। भय निवारण।
  10. 1010 मुखी: विष्णु/दशावतार। सर्वरक्षा। नकारात्मकता नाश।
  11. 1111 मुखी: हनुमान/एकादश रुद्र। साहस। रक्षा। योग सिद्धि।
  12. 1212 मुखी: सूर्य/आदित्य। तेज। नेतृत्व। शासन शक्ति।
  13. 1313 मुखी: कामदेव/इन्द्र। सिद्धि। वशीकरण। आकर्षण।
  14. 1414 मुखी: शिव का तीसरा नेत्र (देव मणि)। भविष्य ज्ञान। परम रक्षा। अत्यंत दुर्लभ।

15-21 मुखी: अत्यंत दुर्लभ। पशुपतिनाथ (नेपाल) क्षेत्र में कभी-कभी मिलते हैं।

धारण नियम: शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष धारण से पूर्व शिव मंत्र से अभिमंत्रित करें। सोमवार या शिवरात्रि पर धारण करें। 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए धारण करें।

चेतावनी: बाजार में नकली रुद्राक्ष बहुत मिलते हैं। जल परीक्षण (पानी में डूबना), ताम्बे की मुद्रा परीक्षण से असली-नकली पहचानें। विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदें।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, पद्म पुराण, रुद्राक्ष जाबालोपनिषद, देवी भागवत
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