विस्तृत उत्तर
रुद्राक्ष भगवान शिव के अश्रुओं (रुद्र + अक्ष = शिव के नेत्र/अश्रु) से उत्पन्न माने जाते हैं। ये 1 मुखी से लेकर 21 मुखी तक पाए जाते हैं, किन्तु 1 से 14 मुखी तक सर्वाधिक प्रचलित हैं।
प्रमुख रुद्राक्ष और उनके लाभ
- 11 मुखी: शिव स्वरूप। परम दुर्लभ। मोक्ष प्रदायक। सर्वोच्च आध्यात्मिक उन्नति।
- 22 मुखी: अर्धनारीश्वर। दाम्पत्य सुख। शिव-शक्ति एकता।
- 33 मुखी: अग्नि देव। पाप नाश। आत्मविश्वास वृद्धि।
- 44 मुखी: ब्रह्मा। विद्या-बुद्धि। छात्रों के लिए उत्तम।
- 55 मुखी (सर्वाधिक प्रचलित): कालाग्नि रुद्र। सर्व रोग नाश। मानसिक शांति। रक्तचाप नियंत्रण।
- 66 मुखी: कार्तिकेय। विद्या-ज्ञान। वाक्शक्ति।
- 77 मुखी: लक्ष्मी/सप्तमातृका। धन-समृद्धि। दरिद्रता नाश।
- 88 मुखी: गणेश। विघ्न नाश। सफलता।
- 99 मुखी: दुर्गा/नवदुर्गा। शक्ति। भय निवारण।
- 1010 मुखी: विष्णु/दशावतार। सर्वरक्षा। नकारात्मकता नाश।
- 1111 मुखी: हनुमान/एकादश रुद्र। साहस। रक्षा। योग सिद्धि।
- 1212 मुखी: सूर्य/आदित्य। तेज। नेतृत्व। शासन शक्ति।
- 1313 मुखी: कामदेव/इन्द्र। सिद्धि। वशीकरण। आकर्षण।
- 1414 मुखी: शिव का तीसरा नेत्र (देव मणि)। भविष्य ज्ञान। परम रक्षा। अत्यंत दुर्लभ।
15-21 मुखी: अत्यंत दुर्लभ। पशुपतिनाथ (नेपाल) क्षेत्र में कभी-कभी मिलते हैं।
धारण नियम: शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष धारण से पूर्व शिव मंत्र से अभिमंत्रित करें। सोमवार या शिवरात्रि पर धारण करें। 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए धारण करें।
चेतावनी: बाजार में नकली रुद्राक्ष बहुत मिलते हैं। जल परीक्षण (पानी में डूबना), ताम्बे की मुद्रा परीक्षण से असली-नकली पहचानें। विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदें।





