विस्तृत उत्तर
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय मुख की दिशा और विधि का विस्तृत विवरण शिव पुराण एवं अन्य शास्त्रों में मिलता है:
मुख की दिशा
शिवपुराण एवं स्कन्द पुराण के अनुसार शिवलिंग की पूजा करते समय भक्त का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा को देवों और ऋषियों की दिशा माना गया है। कुछ आचार्य पूर्व दिशा को भी स्वीकार करते हैं, किन्तु उत्तर दिशा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
बेलपत्र चढ़ाने की विधि
1बेलपत्र उल्टा चढ़ाएं
बेलपत्र की चिकनी सतह (ऊपरी भाग) शिवलिंग को स्पर्श कराते हुए अर्पित करें। मान्यता है कि चिकनी सतह पर देवी लक्ष्मी का वास होता है, अतः इस प्रकार अर्पित करने से शिव-शक्ति दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
2अंगुलियों का नियम
बेलपत्र सदैव अनामिका (रिंग फिंगर), अंगूठे और मध्यमा अंगुली से पकड़कर चढ़ाएं। मध्य वाली पत्ती को पकड़कर शिवलिंग पर अर्पित करें।
3त्रिदलीय बेलपत्र
केवल तीन पत्तियों वाला अखंडित बेलपत्र ही अर्पित करें। कटा-फटा, छिद्रयुक्त या दो/चार पत्तियों वाला बेलपत्र वर्जित है।
4संख्या
शिव पुराण के अनुसार 3, 5, 11, 21, 51 या 101 बेलपत्र चढ़ाना शुभ है। संख्या विषम हो।
5मंत्र
बेलपत्र चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' मंत्र का जप करें। बेलपत्र तोड़ते समय यह मंत्र पढ़ें:
अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेवप्रियः सदा। गृह्यामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात्॥
6तोड़ने के नियम
सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार बेलपत्र तोड़ने के 3 माह तक ताजा माना जाता है।
क्रम
पहले शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, फिर दूध/दही/शहद से अभिषेक करें, उसके बाद बेलपत्र अर्पित करें।





