विस्तृत उत्तर
सुतल लोक का वातावरण अत्यंत सुखद, प्रकाशवान और आनंददायक बताया गया है। अधोलोक होने के कारण वहाँ सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश प्रत्यक्ष रूप से प्रवेश नहीं कर सकता, परंतु महान नागों के फणों पर स्थित अलौकिक और स्व-प्रकाशमान मणियों से निकलने वाली रश्मियां पूरे सुतल लोक को प्रकाशित करती रहती हैं। वहाँ अंधकार का लेशमात्र भी अस्तित्व नहीं रहता। सूर्य और चंद्रमा की किरणें अप्रत्यक्ष रूप से प्रवेश करती हैं, लेकिन सूर्य का आतप निवासियों को नहीं सताता और चंद्रमा की शीतलता कड़ाके की ठंड उत्पन्न नहीं करती। इसलिए सुतल लोक का तापमान सदैव सम, अत्यंत सुखद और आनंददायक रहता है। यहाँ दिव्य औषधियों और रसायनों के प्रभाव से निवासियों को मानसिक क्लेश, शारीरिक रोग, बुढ़ापा, थकान और ऊर्जा की कमी नहीं होती।
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