विस्तृत उत्तर
सुतल लोक में जबरदस्ती प्रवेश इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि साक्षात् नारायण इसके रक्षक हैं। भगवान विष्णु अपने चतुर्भुज गदापाणि रूप में सुतल लोक के द्वार पर महाराजा बलि के रक्षक के रूप में खड़े रहते हैं। रावण के प्रसंग से इसकी अजेयता स्पष्ट होती है। रावण जब बलपूर्वक सुतल में प्रवेश करने पहुँचा, तो भगवान वामन ने उसे रोक दिया और अपने वाम चरण के अंगूठे से हल्की ठोकर मारकर एक करोड़ योजन दूर लंका में फेंक दिया। यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि सुतल लोक ऐसा अभेद्य और सुरक्षित दुर्ग है जहाँ देवता, महान असुर या स्वयं काल भी बलपूर्वक प्रवेश नहीं कर सकते, क्योंकि साक्षात् नारायण इसके रक्षक हैं।
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