विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक की नदियाँ पृथ्वी की नदियों से सर्वथा भिन्न हैं। सुमेरु के निकट मंदराचल पर्वत के ढलानों पर 'देवचूत' नामक विशाल आम्र वृक्ष स्थित हैं। इन वृक्षों से पर्वत के शिखरों के समान बड़े आकार के आम के फल टूटकर गिरते हैं और जब ये विशाल फल फूटते हैं तो उनके अत्यंत मीठे रस से 'अरुणोदा' नामक एक पूरी नदी का निर्माण होता है। इसी प्रकार मेरुमंदराचल पर्वत पर 'जम्बू' के अत्यंत विशाल फल (जो हाथियों के आकार के होते हैं) 10,000 योजन की ऊँचाई से गिरते हैं और उनके रस से 'जम्बू-नदी' नामक सरिता बहती है। कुमुद पर्वत पर शतवल्श नामक एक विशाल बरगद का वृक्ष है जिससे दूध, दही, शहद और घी की नदियां उत्पन्न होती हैं जो स्वर्लोक के निवासियों को वस्त्र और आभूषण भी प्रदान करती हैं।
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