विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण के अनुसार सुमेरु पर्वत पर निवास करने वाले देवताओं के विश्राम और मनोरंजन के लिए चार मुख्य दिव्य उद्यानों का निर्माण किया गया है। ये चार उद्यान हैं — नंदन (Nandana), चैत्ररथ (Caitraratha), वैभ्राजक (Vaibhrajaka) और सर्वतोभद्र (Sarvatobhadra)। इन उद्यानों में कल्पवृक्ष और पारिजात जैसे वृक्ष सुशोभित हैं जो निवासियों की प्रत्येक इच्छा की पूर्ति तत्काल करते हैं। यहाँ देवगण, गंधर्व, अप्सराएं और चारण अपनी पत्नियों के साथ विहार करते हैं। इन उद्यानों का वातावरण अत्यंत सुगंधित, संगीतमय और आनंददायक है। प्रत्येक उद्यान की अपनी विशेषता है और इनमें दिव्य पुष्प, वृक्ष और जल स्रोत हैं जो स्वर्ग के निवासियों को अनंत आनंद प्रदान करते हैं।
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