विस्तृत उत्तर
लोकालोक पर्वत स्वर्लोक और उससे जुड़े सप्तद्वीप क्षेत्र की सबसे बाहरी ब्रह्मांडीय सीमा है। मीठे जल के सागर के पार लोकालोक पर्वत है जो प्रकाश और अंधकार के बीच की ब्रह्मांडीय सीमा निर्धारित करता है। 'लोक' का अर्थ है सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित और बसा हुआ क्षेत्र तथा 'अलोक' का अर्थ है पूर्णतः अंधकारमय और निर्जन क्षेत्र। सूर्य, चन्द्रमा और अन्य ग्रहमंडलों की किरणें इसी लोकालोक पर्वत तक ही भूलोक को प्रकाशित कर पाती हैं। इस पर्वत की ऊँचाई और चौड़ाई दस हजार योजन बताई गई है। लोकालोक के पार 'अलोक-वर्ष' का अंधकारमय क्षेत्र है जहाँ कोई जीव नहीं रहता। इस प्रकार लोकालोक पर्वत ब्रह्मांड के भौतिक और दृश्यमान क्षेत्र की अंतिम सीमा है जो यह दर्शाता है कि सृष्टि की एक निश्चित भौगोलिक सीमा है।
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