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विस्तृत उत्तर
तलातल के निवासियों के शरीर में स्वेद, अर्थात पसीना, नहीं आता। यहाँ का वातावरण मृदु, सुखद और सर्वदा वसंत ऋतु के समान स्थिर है। सूर्य की तपन या दाहकता यहाँ नहीं है और चंद्रमा की कष्टकारी शीतलता भी नहीं है। यहाँ जीवन ऊर्जा का स्रोत भौतिक नहीं, बल्कि मायावी और तपोबल से रचित है। इसी दिव्य और स्थिर वातावरण में निवासियों को पसीना, रोग, बुढ़ापा या बालों की सफेदी नहीं होती।
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