विस्तृत उत्तर
तलातल लोक से भोग-विलास का परिणाम यह समझ आता है कि भौतिक सुख बहुत आकर्षक होने पर भी शाश्वत नहीं होते। तलातल में जीव दिव्य मदिरा, सुंदर स्त्रियों, उत्तम व्यंजनों, रत्नमय महलों और अतुलनीय ऐश्वर्य का भोग करते हैं। उन्हें रोग, वृद्धावस्था और दरिद्रता नहीं होती। फिर भी उनका आध्यात्मिक स्तर शून्य रहता है और वे ईश्वर को भूल जाते हैं। पुण्य क्षय होने पर उन्हें फिर पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है। इसलिए भोग-विलास जीव को मोक्ष नहीं देता, बल्कि जन्म-मरण के चक्र में बाँधे रख सकता है।
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