विस्तृत उत्तर
पूजा में तांबे के सिक्के रखने की परंपरा अत्यंत प्राचीन और शास्त्र-सम्मत है। इसके पीछे धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक तीनों कारण हैं।
धार्मिक कारण: तांबा सूर्य देव की धातु है। सूर्य सभी देवताओं का राजा और ऊर्जा का स्रोत है। तांबे का सिक्का पूजा में रखने से सूर्य-देवता की कृपा मिलती है। दक्षिणा के रूप में तांबे का सिक्का चढ़ाना पूजा को पूर्ण करता है।
ज्योतिषीय महत्व: तांबा सूर्य ग्रह का प्रतिनिधि है। पूजा में तांबे का सिक्का रखने से जन्मकुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है जिससे स्वास्थ्य, सफलता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
वैज्ञानिक कारण: तांबा एंटीमाइक्रोबियल धातु है। यह जल में घुलकर पानी को शुद्ध करता है। पूजा में तांबे के पात्र में जल और तांबे का सिक्का रखने से वह जल औषधीय गुणवाला हो जाता है। कलश-स्थापना में भी तांबे के कलश को सर्वोत्तम माना जाता है।
प्रयोग: पूजा में कलश के नीचे, देवता के आगे या दक्षिणा के रूप में तांबे का सिक्का रखें। कुबेर-पूजन में तांबे के सिक्के को पीले वस्त्र में रखने से धन-वृद्धि होती है।





